Tuesday, January 18, 2011

हम कदम ( अभिषेक गोस्वामी Vs विश्वास निर्भीक )

हम कुछ बोलेंगे

तुम कुछ सुनोगे
तुम कुछ खिसकाओगे
वो कुछ समझेगा

फिर हम कुछ लिखेंगे
तुम कुछ पढोगे

तुम कुछ प्रस्तुत करोगे

वो कुछ प्रतिक्रिया देगा

फिर हम कुछ बना कर बताएँगे

तुम उसमे कुछ देखोगे

तुम उसे किसी और को दिखाओगे

वो कुछ और देखेगा

फिर हम कुछ करके दिखायेंगे

तुम कुछ गुदगुदाओगे
तुम कुछ कहना चाहोगे

वो कुछ सुनेगा

बात वह

सीधी सच्ची होगी

मसलन

हम ये पूछ रहे होंगे

कि तुम्हारे घर में सब खैरियत से
है ?
पर तुम उसे अनेकार्थक बनाओगे!

अभिषेक गोस्वामी (Poet)
जयपुर की पैदाइश, NSD की थिऐटर इन एजूकेशन . में दशक भर पढाया, अब आज़ाद थिऐटर निर्देशक और सलाहकार हैं, तस्वीरनवाजी का शौक भी दिनों लग गया है उनका अपना थिऐटर समूह- Breathing Space चर्चा में रहा है, लगातार ..... देश भर में और ओमान और चीन में रंगमंचीय जीवन के प्रवास किये है, कवि रूप में लगभग पहली सार्वजनिक उपस्थिति यही साजिश है

विश्वास निर्भीक (Artist)
बर्मिंघम पैलेस सहित कई एकल व समूह कला प्रदर्शनियों में भागीदार रहे. कई पुरस्कारों से सम्मानित व कला निजी व सरकारी संग्रहों में शामिल हैं. जवाहर नवोदय स्कूल बारां में कला शिक्षक है और बारां की कला पर शोधरत है



हम कदम ( प्रभात Vs निधि सक्सेना )

पंद्रह साल
कहाँ वे हरी आँखें

गुलाबी होंठ
मीठी गीली आवाज़

बरखा ऋतु की पुरवाइयों सी चाल- ढाल

कहाँ यह रुखा
, खुरदरा , बेजान
कठोर
, असुंदर आदमी
वह जो प्राकृतिक रंग था त्वचा का उड़ गया था

एक और ही रंग की हो गयी थी शरीर की चमड़ी

बीते पंद्रह सालो की मृतता से बनी
बीते पंद्रह सालो की जीवंतता से बनी होती यह चमड़ी

कोई और ही रंग होता इसका

लिभाता हुआ अपनी आब से अपनी प्रियता से

तब एक ही मलाल की तरह नहीं पुता होता चहरे पर

कहाँ पच्चीस कहाँ चालीस

तब यही छलकता होठों पर

चालीस की उम्र का भी कमबख्त

एक अपनी ही तरह का असर

एक अपनी ही तरह का आकर्षण होता है

सुनिए तो यह किसकी नींद कराह रही है

कोई जरुरत नहीं थी मुझे इन पंद्रह सालों की

प्रभात (Poet)
जयपुर के एक गाँव में जन्म... राजस्थान की नई पीढ़ी के प्रतिनिधि कवि है.... एक कविता संग्रह -'' बनजारा नमक लाया'' पिछले साल आया.... वे ग्रामीण चेतना के मुखर कवि है, इन दिनों सवाई माधोपुर में एक NGO के साथ जुड़े है और बालपत्रिका 'मोरंगे' का संपादन कर रहे है . इस साल कविता के लिए राजस्थान पत्रिका के साहित्य पुरस्कार से नवाजे गए हैं


निधि सक्सेना (Artist)

वे मूर्तिकार और फ़िल्मकार हैं, जयपुर में जन्मी , कविताएं लिखती है टीवी सीरियल बनाये हैं, इन दिनों अखबारों और मेगजीन्स की भी सक्रिय लेखिका है .मुम्बई में रहती है.